जिला योजना की अवषेश धनराशि ही खर्च नहीं कर सके विभाग – Udham Singh Nagar, Uttarakhand

रुद्रपुर 27 दिसम्बर – जिलाधिकारी चन्द्रेश कुमार ने जिला, राज्य,
केन्द्र एवं बाह्य सहायतित योजनाओं बीस सूत्रीय कार्यक्रम एवं बीएडीपी की
समीक्षा विकास भवन सभागार में की। समीक्षा के दौरान पाया गया कि विभिन्न
विभागों द्वारा जिला योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष  2015-16 की अवशेष 
धनराशि  अभी तक खर्च नहीं की गई, जिस पर जिलाधिकारी ने कडी नाराजगी जाहिर
की। उन्होंने सम्बन्धित विभागों के अधिकारियों को चेतावनी दी कि जिला योजना
के अन्तर्गत वर्ष  2015-16 की अवषेश धनराषि हर हाल में 31 दिसम्बर तक शत-प्रतिशत खर्च कर ली जाय अन्यथा सम्बन्धित विभाग के खिलाफ सख्त कार्यवाही
अमल में लायी जायेगी। जल निगम द्वारा जिला योजना 2015-16 की अवशेष  धनराषि
के खर्च का सही ब्यौरा उपलब्ध न कराये जाने पर जिलाधिकारी ने जल निगम के
समस्त स्टाफ का माह दिसम्बर का वेतन रोकने के निर्देष दिये। उन्होंने एमएनए
रुद्रपुर/काशीपुर को भी पिछले वर्श की अवशेष  धनराषि के खर्च का ब्यौरा
मदवार उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी बैठकों
में पूर्ण तैयारियों के साथ प्रतिभाग करें। उन्होंने कहा जो विभागीय कार्य
हो गये हैं उनकी धनराषि का भुगतान शीघ्र किया जाय साथ ही जिन ठेकेदारों
द्वारा गुणवत्तायुक्त कार्य नहीं किये गये है उनके खिलाफ कार्यवाही की जाय।
उन्होंने लोनिवि के अधिकारियों को पूल्ड आवास के कार्याें में तेजी लाने,
जल निगम व जल संस्थान के अधिकारियों को स्वीकृत हैण्ड पम्पों को षीघ्र
लगाने के निर्देष दिये। उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारियों को
निर्देंष दिये कि जिन कार्याें के टेण्डर आमन्त्रित किये जा चुके हैं उनमें
षीघ्र कार्य प्रारम्भ किया जाय। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को निर्देंष
देते हुए कहा सांसद निधि व विधायक निधि के अन्तर्गत जिन कार्याें की 25
प्रतिषत धनराषि रोकी गई है उसका मिलान कर उसे षीघ्र रिलीज किया जाय।
जिलाधिकारी ने कृशि उद्यान, पशुपालन, डेरी व मत्स्य विभाग के अधिकारियों को
निर्देष देते हुए कहा कि वे आपसी सामंजस्य से कार्य करें ताकि क्षेत्र में
निवासरत कृशकों की आर्थिक स्थिति में सुधार आ सके। उन्होंने कहा मत्स्य
पालन की अपार सम्भावनायें हैं इसके लिए क्षेत्र के लोगों को प्रोत्साहित कर
मनरेगा योजना के अन्तर्गत कच्चे तालाबों का निर्माण किया जाय। बीस सूत्रीय
कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि सभी मदो में जनपद ए
श्रेणी में रहे इसके लिए अभी से कार्य योजना बना ली जाय।  जिला योजना हेतु
वर्श 2016-17 में 63.07 करोड अनुमोदित परिव्यय के सापेक्ष अभी तक जनपद को
34.62 करोड धनराषि अवमुक्त हुई है जिसके अन्तर्गत 18 करोड की धनराषि खर्च
कर ली गई है।  
 
     सीमान्त क्षेत्र विकास योजना(डीएवीपी) की
समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि वर्श 2016-17 के अन्तर्गत जिन
कार्योें हेतु धनराषि अवमुक्त हो गयी है वे कार्य षीघ्र प्रारम्भ कर लिये
जायें।उन्होंने कहा कि विकास कार्याें में गुणवत्ता व समयबद्धता का ध्यान
रहे। साथ ही उन्होंने कहा कि वर्श 2017-18 में किये जाने वाले कार्याें के
प्रस्ताव बनाकर उपलब्ध करा दिये जायें। उन्होंने सम्बन्धित अधिकारियों को
निर्देष दिये कि डीएवीपी के अन्तर्गत जो भी कार्य किये जाय वो धरातल पर
दिखाई देने चाहिए। जिलाधिकारी ने कहा डीएवीपी के अन्तर्गत बडी योजनाओं का
चयन किया जाय जिससे से क्षेत्र के अधिकत्तर लोग लाभान्वित हो सकें। उन्होने
बीएडीपी के अन्तर्गत बनाये गये खटीमा चिकित्सालय की विस्तृत रिपोर्ट
प्रस्तुत करने के निर्देष सीएमओ को दिये। उन्होनंे कहा डीएवीपी के अन्तर्गत
जिन कार्याें में मनरेगा से डवटेलिंग करायी जानी है वहां पूर्व में ही
वर्क आर्डर स्वीकृत करा लिये जाय। उन्होंने कहा इस योजना के अन्तर्गत पेयजल
के कार्याें को प्राथमिकता दी जाय। उन्होंने कहा सीमान्त क्षेत्रों में
कुछ विद्यालयों को चिहिन्त कर सोलर प्लान्ट लगाने हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत
किये जाय। जिलाधिकारी ने कमाण्डेन्ट एसएसबी केसी राणा को खटीमा एसएसबी
क्षेत्र में सोलर प्लान्ट से जोडने, स्पोटर्स एक्टिविटी को विकसित करने
हेतु प्रस्ताव देने को कहा गया।      
       बैठक में मुख्य
विकास अधिकारी आलोक कुमार पाण्डेय, पीडी हिमांषु जोषी, जिला अर्थ एवं
संख्याधिकारी ललित चन्द आर्य, सीएमओ एचके जोषी, मुख्य कृशि अधिकारी पीके
सिहं, मुख्य षिक्षा अधिकारी पीएन सिंह, जिला उद्यान अधिकारी रतन सिंह, ईई
लोनिवि केसी पंत, ईई सिचाई संजय राज सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी
उपस्थित थे।
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