पंतनगर विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह संपन्न – Pant Nagar Annual Function

पंतनगर। 17 नवम्बर 2016। पंतनगर विश्वविद्यालय के सम्मुख, उत्तराखण्ड
में होने के कारण, पर्वतीय कृषि के विकास की चुनौती एवं प्रमुख जिम्मेदारी
है, जिसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह बात आज उत्तराखण्ड के राज्यपाल एवं
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, डा. के.के. पाॅल, ने पंतनगर विश्वविद्यालय के
30वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कही।
प्रशासनिक भवन स्थित दीक्षांत प्रांगण में आयोजित इस समारोह में विशिष्ट
अतिथि के रूप में प्रदेश के सांसद, श्री भगत सिंह कोश्यारी, मंचासीन थे।
Pant Nagar Annual Function
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राज्यपाल ने कहा कि पर्वतीय कृषि में महिलाओं की प्रमुख भागीदारी को देखते हुए उनके
लिए थकान एवं तनाव कम करने वाले छोटे एवं हल्के कृषि उपकरण विकसित किए
जाने चाहिएं। साथ ही कृषि में मोबाइल-टेलीफोनी एवं अन्य संचार तकनीकों के
प्रयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ मौसम-आधारित  कृषि सूचनाएं प्रदान कर
संसाधनों के उचित प्रबंधन एवं प्रयोग को बढ़ावा देने की उन्होंने बात कही
तथा फल, सूखे मेवे, सगंधीय पौधे एवं अन्य नकदी फसलों का विभिन्न पर्वतीय
क्षेत्रों में उत्पादन किए जाने की उन्होेेंने आवष्यकता बतायी। शिक्षण एवं
शोध में अंतःविषयी समन्वित नजरिया अपनाये जाने तथा ज्ञान के उद्भव, प्रसार
एवं आत्मसात किये जाने की ओर कार्य करने के साथ-साथ समगतिषील खाद्य
संप्रभुसत्ता को अंतिम उद्देश्य बनाने के लिए उन्होंने विश्वविद्यालय को
कहा। कृषि को अधिक वैज्ञानिक, लाभप्रद एवं आकर्षक बनाने के लिए इसमें अधिक
शोध का निवेष किए जाने की भी उन्होंने सलाह दी। डा. पाॅल ने पंतनगर
विश्वविद्यालय की हरित क्रांति में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को सराहते
हुए देश में वर्ष 1950 से खाद्यान्न, दूध, मत्स्य उत्पादन, इत्यादि विभिन्न
कृषि क्षेत्रों में हुई सफल प्रगति, जो जनसंख्या वृ़िद्ध की दर से अधिक
तेज थी, का भी जिक्र किया। कृषि उत्पादन वृद्धि में अच्छे बीज की भूमिका पर
बल देते हुए उन्होंने पंतनगर के बीजों के बारे में भी बताया, जिनके द्वारा
बोई गई हरित क्रांति से देश खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बना। राज्यपाल ने
खाद्यान्न सप्रभुत्ता की ओर बढ़ने का आह्वान करते हुए वैज्ञानिकों से पूर्ण
स्वतंत्रता प्राप्त करने हेतु सभी आवश्यक निवेशों जैसे उर्वरक इत्यादि पर
अपना नियंत्रण बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर उन्होंने सभी
उपाधि, पदक एवं अवार्ड प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ कुलपति
एवं संकाय सदस्यों को बधाई दी।
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कुलपति डा. जे. कुमार ने दीक्षांत समारोह में सभी अतिथियों व उपस्थित जनों का स्वागत करते हुए
विश्वविद्यालय की विभिन्न उपलब्धियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
विश्वविद्यालय का नाम ब्रिक्स देशों के प्रथम 200 संस्थानों की सूची में इस
वर्ष दोबारा आने के बारे में बताने के साथ-साथ उन्होंने विश्वविद्यालय के
109 विद्यार्थियों द्वारा आई.सी.ए.आर. की जे.आर.एफ. एवं एस.आर.एफ. परीक्षा
की प्रतियोगिता में सफल होने तथा अनेक विद्यार्थियों का देश के विभिन्न
उद्योगों में नियोजित होने के बारे में जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों
द्वारा लुधियाना में आयोजित कृषि उद्यमिता विचार प्रतियोगिता में प्रथम
एवं द्वितीय दोनों स्थान प्राप्त करने के बारें में भी बताया। वर्ष 2016
में 2 करोड़ 44 लाख रूपए की 16 नयी परियोजनाएं प्राप्त होने, राष्ट्रीय बीज
सुरक्षा मिषन में पंतनगर विश्वविद्यालय को दलहनी फसलों के बीज उत्पादन हेतु
चुने जाने, विष्वविद्यालय के 10 से अधिक पेटेंट के लिए कार्यवाही करने तथा
किसान मेले में 1250 कुन्तल बीज की बिक्री किये जाने की भी कुलपति ने
जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा अक्टूबर 2016 में
सौंवा किसान मेला आयोजित करने के अतिरिक्त कृषि विज्ञान केन्द्रों पर भी
किसान मेले आयोजित किये गये हैं। विभिन्न सम्मेलन, कार्यशालाओं, नये
निर्माण कार्य तथा नयी शुरूआतों जैसे बड़ी संख्या में वृक्षारोपण, सौर ऊर्जा
के प्रयोग व बीज उत्पादन हेतु ग्रामों को गोद लिए जाने तथा नयी स्काॅलरशिप
प्रारम्भ किये जाने की भी डा. जे. कुमार ने जानकारी दी। कुलपति ने आश्वासन
दिया कि किसानों के सामने आ रही नयी चुनौतियों का सामना करने के लिए
विश्वविद्यालय उनके जवाब तलाशेगा तथा अपने विद्यार्थियों में इनका सामना
करने हेतु दक्षता प्रदान करेगा।
इस दीक्षांत समारोह में
कुलाधिपति, डा. के.के. पाॅल, ने 1253 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की।
साथ ही 37 विद्यार्थियों को विभिन्न पदक प्रदान किये गये, जिनमें 15
विद्यार्थियों को कुलपति स्वर्ण पदक, 11 विद्यार्थियों को कुलपति रजत पदक
तथा 10 विद्यार्थियों को कुलपति कांस्य पदक प्रदान किये गये। सर्वोत्तम
स्नातक विद्यार्थी को दिया जाने वाला कुलाधिपति स्वर्ण पदक, आशुतोष भट्ट को
दिया गया। इनके अतिरिक्त 6 विद्यार्थियों को विभिन्न अवार्ड प्रदान किये
गये, जिनमें एक विद्यार्थी को श्री पूरन आनन्द अदलखा स्वर्ण पदक अवार्ड, एक
विद्यार्थी को श्रीमती सरस्वती पण्डा स्वर्ण पदक अवार्ड, ,एक विद्यार्थी
को श्रीमती नागम्मा शान्ताबाई अवार्ड, एक विद्यार्थी को डा. राम शिरोमणी
तिवारी अवार्ड तथा दो विद्यार्थियों को चैधरी चरण सिंह स्मृति प्रतिभा
पुरस्कार सम्मिलित हैं।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की प्रबन्ध
परिषद् एवं विद्वत परिषद् के सदस्यों के साथ-साथ विश्वविद्यालय के
महाविद्यालयों के संकाय सदस्य, अधिकारी, कर्मचारी एवं विद्यार्थी तथा
जिलाधिकारी चन्द्रेश कुमार, एसएसपी सैंथिल अबुदयी उपस्थित थे।
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