सब गोल माल है भई सब गोलमाल है

उत्तराखंड के मुख्य अख़बारों में दिनांक 30
जनवरी 2014 को बहुत से नौकरी के आवदेन मांगे गए जिनकी अंतिम तिथि 3 से 5
फरवरी है, और आदेश 1 महीने पुराना। विज्ञापनो पर लाखों रुपये खर्च करने का
क्या फायदा -, उत्तराखंड सरकार ने अपनी वेबसाइट पर आवेदन का विज्ञापन 1
महीने पहले क्यों नहीं दिया , क्या इसमें सरकारी विभाग और अखबार वालों कि
मिली भगत नजर नहीं आती ?
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